योग (ध्यान) से लोगों जीवन में सुख शांति

योग (ध्यान) से लोगों जीवन में सुख शांति

शुभसमय वैदिक फाउंडेशन योग (ध्यान) के माध्यम से भी लोगों के जीवन को सुख शांति पूर्ण बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए ध्यानशालाओं का संचालन करते हैं। हम अनेक संस्थाओं एवं संस्थानों के साथ मिलकर उनके कार्यस्थलों पर ध्यान की कक्षाओं का आयोजन कर रहे हैं जिनके आशातीत लाभ भी लोगों को प्राप्त हो रहे हैंं। जीवन में ध्यान का बहुत अधिक महत्व है। मनुष्य की सामान्य जीवनचर्या ध्यान द्वारा नवदृष्टि प्राप्त करती है। इस दृष्टि में जीवन के पूर्वाग्रहों का जो वैयक्तिक विश्लेषण होता है, वह सोचने-समझने के लिए व्यक्ति को बौद्धिक स्वतंत्रता प्रदान करता है। ध्यान का आशय आंखें बंद कर किसी भौतिक, सांसारिक और मायावी विचार या भावना के निरंतर संस्मरण से नहीं है। सांसारिक गतिविधियों में शारीरिक रूप से उपस्थित रहते हुए भी व्यक्तिगत भावना का केंद्रबिंदु यदि असांसारिक होने को उत्प्रेरित करे तो समझ लेना चाहिए कि जीवन ध्यान पर टिका हुआ है। ध्यान से तात्पर्य धन, पद और प्रसिद्धि आदि मायावी आकर्षणों के प्रति स्थिर होना भी नहीं है। ध्यान व्यक्ति को जीवनभर मंगलाचरण करने का संबल देता है, जिससे विकारों का शमन होता है।

ध्यान की गंभीरता व गंभीर स्थिरता व्यक्ति के चारों ओर सकारात्मक स्थितियों का निर्माण करती है। इससे क्रोध, काम, लोभ और मोह के बंधनों से मुक्ति मिलती है। ध्यानस्थ रहकर नकारात्मक मनोभावों पर नियंत्रण का अभ्यास होता है। व्यक्तित्व के विचलन पर इस विधि से विजय प्राप्त करना बड़ा सार्थक है। इस प्रक्रिया में समाज, शासन, व्यापार और रिश्ते-नातों की सहायता की आवश्यकता नहीं पड़ती। यह स्वयं के लिए स्वयंभूत होने का मूल्यवान मार्ग है। भौतिक कार्यों में असफल होने पर भी अवचेतन मन में नित नई सफलता की कामना करना और असफलताओं पर बाह्य जगत की नकारात्मक प्रतिक्रियाओं से विमुख रहना ध्यानाभ्यास से ही संभव है। हम ध्यान से सधे अपने व्यक्तित्व को अनेक जनकल्याणकारी कार्य में लगा सकते हैं। ध्यान मन व अवचेतन मन की भ्रांतियों और भ्रमों से छूटने का सरल मार्ग है। ध्यान का आत्मिक विस्तार होना चाहिए। इसकी सहायता से विषयों के आकर्षण ध्वस्त होते हैं और विघ्नों, विकारों से मुक्त होने का अडिग़ संकल्प बनता है। मनुष्य जीवन का लक्ष्य क्या हो, इस प्रश्न के यथोचित उत्तर ध्यान के दैनिक अभ्यास से अवश्य मिल सकते हैं।

हमारा मत है कि ध्यान हमारे तन, मन और आत्मा को पोषण प्रदान करता है। ध्यान की मौजूद समय में अनेक विधियां प्रचलित हैं। लेकिन हमने महादेव शिव के अनुभूत विधियों का अपना आधार बनाया और उनके प्रयोग कर रहे हैं। महादेव ने 112 प्रकार की ध्यान विधियों के बारे में माता पार्वती को बताया है। जिन्हें सावधानीपूर्वक प्रयोग कर कोई भी व्यक्ति अपने जीवन को भौतिकवाद और अध्यात्मिकवाद की संकरी पगड़ंडी पर संतुलित कर आगे बढ़ सकता है।

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